भारत में समाजवाद – संभावनाएं एवं चुनौतियां

इंदौर। पूर्व सांसद एटक के पूर्व महासचिव, जननेता कॉमरेड होमी एफ. दाजी की जन्मशताब्दी वर्ष के प्रारंभ – 5 सितंबर- के अवसर पर इंदौर के गांधी हॉल प्रांगण स्थित अभिनव कला समाज सभागृह में भारत में समाजवाद – संभावनाएं एवं चुनौतियां विषय पर स्मृति राष्ट्रीय संवाद का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में समाजवाद का लक्ष्य स्वतंत्रता के बाद बनी  नीतियों का आधार रहा है। नेहरू और इंदिरा के काल में जमींदारी उन्मूलन, भूमि सुधार, मिश्रित अर्थव्यवस्था, वोट का समान अधिकार, आरक्षण, पब्लिक सेक्टर, मजदूर हितैषी कानून समाजवादी नीतियों के द्योतक थे। आज उन्हीं अधिकारों, कानूनों पर हमला हो रहा है। 

समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने की जरूरत है। आज लोकतंत्र पर ख़तरा है। टेक्नोलॉजी और अन्य माध्यमों से लोकतंत्र पर चोट की जा रही है। इन मुद्दों पर जनांदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। हमें होमी दाजी जैसे जननेता की राह पर चलने की जरूरत है।

श्री सिंह ने कहा कि देश शनै: शनै: समाजवादी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा था। जिस पर अब विराम लग चुका है। पुनः उस लक्ष्य की ओर लौटना अब आसान नहीं है। आजादी की लड़ाई में एक संगठन को छोड़कर हर वर्ग के लोग शामिल थे। जिन लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया वे ही आज देश पर राज कर रहे हैं। इनकी विचारधारा मूल रूप से लोकतंत्र विरोधी है। जवाहरलाल नेहरू मिश्रित अर्थव्यवस्था के माध्यम से समाजवाद का लक्ष्य प्राप्त करना चाहते थे। 

उन्होंने कहा कि निजीकरण की नीतियों के चलते श्रमिक वर्ग आरक्षण के लाभ से वंचित हो रहा है। नौकरियों में सामाजिक सुरक्षा समाप्त कर दी गई है। आउटसोर्सिंग से होने वाली भर्ती से श्रमिक वर्ग का बे इंतेहा शोषण हो रहा है। वर्तमान सरकार ने श्रमिकों से यूनियन बनाने का अधिकार छीन लिया है। अब यूनियन बनाना एसडीएम के रहमों करम पर निर्भर है। विगत 11 वर्षों में अमीरों और गरीबों में खाई बढ़ती जा रही है। कोविड काल में जब सभी रोजगार धंधे बंद थे,तब भी कॉर्पोरेट मुनाफा कमा रहे थे। देश की 40 प्रतिशत संपत्ति 200 परिवारों के हाथों में सिमट कर रह गई है। वर्तमान में धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के लक्ष्य को बचाने के लिए लोकतंत्र को बचाना जरूरी है। मतदाता सूची में नागरिक का नाम आने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, इसे अब मतदाताओं पर ही थोप दिया गया है। संविधान को बचाने के लिए जन शिक्षण जरूरी है। लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता पर भरोसा रखने वालों को एकजुट होना पड़ेगा। होमी दाजी की तरह जनता की लड़ाइयों में शामिल होना होगा। धर्म की राजनीति और धर्मांधता का जिन्न बोतल से निकला तो गया है इसे वापस बोतल में बंद करना आसान नहीं है।

प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार के आदिवासियों पर दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह देश तो आदिवासियों का ही है, जो की प्रकृति पूजक हैं। हम लोग तो मध्य एशिया से आए थे। आदिवासियों को किसी भी धर्म से जोड़ना उचित नहीं है। वर्तमान में राजनीति को धर्म और व्यवसाय में बदल दिया गया है। यह धर्मांधता नफरत फैला रही है। जबकि इंसानियत ही धर्म का मूल आधार है।

समाजवादी विचारक एवं प्रगतिशील लेखक संघ मध्यप्रदेश के राज्य सचिव मंडल सदस्य सत्यम सागर ने अपने संबोधन में कहा कि समाजवाद हमारे आजादी के आंदोलन का लक्ष्य था। समाजवादी आंदोलन ने देश को बेहतरीन लेखक, कवि, कलाकार, फ़िल्मकार दिए जिन्होने आम जनता के मुद्दों को स्वर दिया। संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और प्रजातंत्र हमारे संविधान के मूल आधार हैं।  आज़ादी ने प्रजा को नागरिक बनाया था। आज सरकार इन्हीं नागरिकों को 5 किलो राशन की लाइन में खड़ा कर फिर प्रजा बना रहै है। 

सत्यम ने कहा कि समान निःशुल्क शिक्षा, रोजगार गारंटी, भूमि सुधार, सबके लिए आवास समाजवाद की बुनियादी जरूरत है। इसके लिए संसाधनों पर समाज की मिल्कियत होना जरूरी है।। लेनिन,  चेग्वारा, नेहरू ने इसे सम्भव बनाया था। यह आज भी सम्भव है।

उन्होंने कहा कि हम कामरेड दाजी के स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं। हमें नाजीवाद का मुकाबला दाजीवाद से करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है, यह शिक्षा बताती है कि समाजवाद ही देश का भविष्य है। यह वर्ष केवल आरएसएस का ही नहीं अपितु कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना का भी शताब्दी वर्ष है। कम्युनिस्ट पार्टी ने स्वतंत्रता संग्राम से देश के नौजवानों, विद्यार्थियों, मजदूर- किसानों को जोड़ा था। मध्य प्रदेश में कम्युनिस्ट पार्टी का गठन 1943 में हुआ था। देश में उदारता और सामाजिक सौहार्द का माहौल रहा है। इंदौर वासियों ने एक बेहद अल्पसंख्यक समाज पारसी समुदाय से आए नौजवान को सांसद और विधायक चुना। जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई से खुद को दूर रखा था वे ही आज राष्ट्रभक्ति के प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। यह विडंबना है कि युद्ध में शौर्य हमारे देश की सेना दिखाती है और सीज फायर का आदेश अमेरिका से आता है। वर्तमान में सत्ता में बैठी ताकतों का देश के निर्माण में कोई योगदान नहीं था। इसलिए वे इसे नष्ट करने पर उतारू हैं।

सत्यम ने कहा कि कार्ल मार्क्स ने इंसानी बराबरी का एक स्वप्न देखा जिसे लेनिन ने रूस में साकार किया। 1950 तक एक तिहाई दुनिया समाजवादी खेमे में बदल चुकी थी। आज देश में दो लोगों द्वारा दो लोगों के लिए बन रही नीतियों के कारण बड़ी तेजी से असमानता भी बढ़ रही है। निजाम बदलेगा तो नीतियां भी बदलेगी, साथ ही लोकतंत्र और समाजवाद का स्वप्न भी बचेगा।

विषय प्रवर्तन करते हुए समाजवादी विचार प्रसार केंद्र न्यास के प्रबंध न्यासी अरविन्द पोरवाल ने कहा कि आज कॉमरेड होमी दाजी की जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत है और साथ ही भारत में समाजवाद की सौ वर्ष की यात्रा को याद करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि कॉमरेड दाजी ने समाजवाद को केवल सिद्धांत न मानकर उसे जिया और मजदूरों-किसानों व आम जनता के संघर्षों से जोड़ा। भारत में समाजवाद की यात्रा रूसी क्रांति प्रेरित  होकर स्वतंत्र भारत की पंचवर्षीय योजनाओं, राष्ट्रीयकरण और प्रगतिशील सुधारों तक फैली है। नई आर्थिक नीतियों (1991) ने समाजवाद को हाशिये पर धकेला, लेकिन आज की विषम परिस्थितियों में समाजवाद के विचार को बनाए रखने की आवश्यक है। यही कॉमरेड होमी दाजी की स्मृति में सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

श्री पोरवाल ने कहा कि रूस में हुई बोल्शेविक क्रांति का असर भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में हुआ था। भगतसिंह ने अपने संगठन में समाजवाद शब्द को जोड़ा था। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का गठन 1925 में हुआ, जिसने अपना लक्ष्य वैज्ञानिक आधार पर समाजवादी समाज का निर्माण रखा। समाजवादी विचारधारा की यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी। 1957 में नेहरू जी के नेतृत्व में देश  में पंचवर्षीय योजनाएं लागू की गई। जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार हुआ। 1991 में उदारीकरण की नीतियों ने समाजवादी समाज के लक्ष्य को धूमिल कर दिया। समाजवाद के विचार को हाशिए पर धकेल दिया गया। समाजवादी विचार की ही ताकत थी कि एक समय में भारतीय जनता पार्टी ने भी गांधीवादी समाज निर्माण की बात कही थी। लेकिन उनकी नीतियां सदैव पूंजीपति परस्त एवं धार्मिक कट्टरता को बढ़ाने वाली रही है। मनमोहन सिंह सरकार के दौर में भी सूचना, भोजन, स्वास्थ्य के अधिकारों की नीतियां बनाई गई थी जिन्हें अब समाप्त कर दिया गया है। 

कार्यक्रम के प्रारंभ में आमंत्रित अतिथियों का सूत की माला एवं स्मृति चिन्ह से स्वागत स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्री प्रवीण खारीवाल, श्रम संगठनों की संयुक्त अभियान समिति के संयोजक एवं इंटक (INTUC) के प्रदेश अध्यक्ष श्री श्यामसुंदर यादव, अभ्यास मंडल के शिवाजी मोहिते, रामस्वरूप मंत्री, कैलाश लिम्बोदिया, हरनाम सिंह, फादर पायस, मनोहर लिम्बोदिया, राहुल निहोरे, सारिका श्रीवास्तव, योगेन्द्र महावर, , प्रकाश पाठक ने किया।

अध्यक्षीय भाषण श्री श्यामसुंदर यादव ने दिया और आभार माना कॉमरेड रुद्रपाल यादव ने। आयोजन में हाल ही में दिवंगत हुए प्रगतिशील लेखक संघ के संरक्षक मंडल सदस्य, वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णकांत निलोसे से एवं होली स्पिरिट चर्च इंदौर के फादर कूज़ी वैली जोसफ प्रसाद को  भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।  संचालन श्री विवेक मेहता ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

यह आयोजन समाजवादी विचार प्रसार केंद्र न्यास, स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश, अभ्यास मंडल इंदौर, श्रम संगठनों की संयुक्त अभियान समिति एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (इंदौर जिला इकाई) द्वारा संयुक्त रूप किया गया था।

(हरनाम सिंह की रिपोर्ट।)

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